बच्चों को भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मिलेगी मदद

सुक्खू सरकार ने सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू करने का लिया ऐतिहासिक निर्णय

शिक्षा क्षेत्र में होगा बदलाव, विद्यार्थी-अध्यापक अनुपात में भी हिमाचल प्रदेश देशभर में अग्रणी

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश व्यवस्था परिवर्तन के ध्येय के साथ निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। हर क्षेत्र में सार्थक दृष्टिकोण के साथ नवीन पहल की जा रही है। प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह पहल सरकारी संस्थानों में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करते हुए उन्हें भविष्य की प्रतिस्पर्धाओं और चुनौतियों के लिए तैयार करेगी। सरकारी विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम का निर्णय मुख्यमंत्री ने गहन चिंतन और विशेषज्ञों से हर पहलू पर गंभीरता से विचार-विमर्श कर विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया है। यह कदम हिमाचल प्रदेश के प्रगतिशील भविष्य की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने चुनावी गारंटी के अनुरूप सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम की शुरुआत की है, जिसके फलस्वरूप आज इन कक्षाओं में पढऩे वाले बच्चे हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा में भी आत्मविश्वास और कुशलता से अपने विचारों और भावनाओं को प्रकट करने में काबिल बन रहे हैं। वर्तमान प्रदेश सरकार मौजूदा शैक्षणिक संस्थानों को सशक्त करते हुए इन्हें आधुनिक सुविधाओं और पर्याप्त मानव संसाधनों से युक्त कर रही है। इसी उद्देश्य से इनका युक्तिकरण भी किया गया है।

इन कड़े, लेकिन बेहद आवश्यक निर्णयों का प्रतिफल है कि आज हिमाचल विद्यार्थी-अध्यापक अनुपात में देशभर में अग्रणी बनकर उभरा है और शिक्षा व्यवस्था में आशातीत सुधार देखने को मिल रहा है। आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाने के उद्देश्य से हर विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और अन्य आधुनिक संसाधन उपलब्ध करवाए जाएंगे, ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो। प्रदेश सरकार द्वारा 500 प्राथमिक स्कूल, 100 उच्च विद्यालय, 200 वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, 48 महाविद्यालयों और दो संस्कृत महाविद्यालयों सहित कुल 850 शैक्षणिक संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थान घोषित किया गया है। इन स्कूलों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है।प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा साइंस जैसे आधुनिक विषय शुरू कर बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है।

20 लाख का शिक्षा ऋण
प्रदेश के बच्चों के उच्च शिक्षा के सपने को साकार करने के लिए डा. वाईएस परमार विद्यार्थी ऋण योजना आरम्भ की गई है। इसके तहत विद्यार्थी देश व विदेश में पढ़ाई के लिए एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपए तक का शिक्षा ऋण प्राप्त कर सकते हैं।

शिक्षा विभाग में अब तक हजारों पदों पर भर्ती

सरकार द्वारा शिक्षा विभाग में शिक्षकों के 5400 से अधिक पद और शिक्षा विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 7000 से अधिक पद भरे गए हैं। पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए अध्यापकों को शैक्षणिक सत्र के बीच सेवानिवृत्त नहीं करने का भी निर्णय लिया है।

विदेश भेजे टीचर-स्टूडेंट

पहली बार छात्रों को शैक्षणिक भ्रमण और अध्यापकों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर अध्ययन करने के लिए विदेश एवं देश के विभिन्न स्थानों में भेजा जा रहा है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में 334 अध्यापकों और 50 छात्रों को सिंगापुर भेजा गया।

हिमाचल में अलग-अलग शिक्षा निदेशालय का गठन

राज्य सरकार ने शिक्षा निदेशालयों का पुनर्गठन किया है। इसके अंतर्गत स्कूल शिक्षा निदेशालय को अलग कर दिया गया है, जो माध्यमिक स्तर की शिक्षा के सभी मामलों को देखेगा। इसी प्रकार, उच्च शिक्षा निदेशालय केवल उच्च शिक्षा से जुड़े मामलों को देखेगा।

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