ब्यास और सहायक नदियों में आई बाढ़ से मनाली और ऊझी घाटी के बागवान चिंतित हैं। एक अरब से अधिक की कीमत का सेब बगीचों और गोदामों में फंस गया है। जल्द सड़कें नहीं खुलीं तो बागवानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ जाएगी। हालात यह है कि बगीचों में सेब की लाली गायब होने लगी है तो गोदामों में तोड़कर रखा सेब भी खराब होने लगा है।
कुल्लू जिला सेब उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यह हिमाचल प्रदेश की महत्वपूर्ण फसल है, जहां कई परिवार सेब की खेती पर निर्भर हैं। यहां सालाना एक लाख 50 हजार मीट्रिक टन से अधिक का उत्पादन होता है। कुल्लू में गाला, किंग राट, रॉयल डिलीशियस और हनी क्रिस्प जैसी विदेशी किस्में लोकप्रिय हैं। लेकिन,सड़कें बंद होने से सेब समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। लगातार बारिश के कारण 15 दिनों से तुड़ान नहीं हुआ। अब यातायात पूरी तरह से बंद पड़ा है। मनाली और आसपास के ग्रामीण इलाकों का 85 प्रतिशत से अभी बगीचों में ही है। बगीचों में तैयार सेब काला पड़ने लगा है तो गोदामों में तोड़ कर रखा सेब सड़ने के कगार पर है।
मनाली का संपर्क फिलहाल पूरी तरह से कटा हुआ है। मनाली का सेब मुख्य रूप से आलूग्राउंड और पतलीकूहल सब्जी मंडी को ही जाता है। बाढ़ से आलूग्राउंड का इलाका ध्वस्त हो गया है। जबकि पतलीकूहल में भी सब्जी मंडी बंद है।
उधर, एसडीएम मनाली रमण कुमार शर्मा ने कहा कि सड़क बहाली का कार्य जारी है। प्रशासन वामतट मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर खोलने का प्रयास कर रहा है। अन्य संपर्क सड़कों बाहणु पुल, मनाली-लेह मार्ग पर भी सड़क बहाली का कार्य जारी है।
85 प्रतिशत से अधिक फसल बगीचों में अटका
बागवान चुन्नी लाल ठाकुर ने बताया कि उनका सेब गोदाम में ही पड़ा हुआ है। बगीचों में तुड़ान नहीं हो पा रहा। सेब काला पड़ने लगा है। जल्द सड़कें नहीं खुलीं, तो बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। सेब यहां के लोगों की मुख्य नकदी फसल है। ऐसे में जल्द से जल्द सड़क मार्ग बहाल होने चाहिए। फिलहाल बगीचों में तुड़ान रोक दिया है। फल उत्पादक मंडल के अध्यक्ष प्रेम शर्मा का कहना है कि निचले इलाके में 70 से 75 जबकि ऊपर वाले इलाकों में 85 प्रतिशत से अधिक फसल बगीचों में ही है। कुल्लू में एक अरब से अधिक का सेब उत्पादन होता है। निचले इलाकों का सेब जीप से मंडियों में पहुंच रहा है लेकिन मनाली व आसपास के इलाके अभी भी कटे हुए हैं।
