पाकिस्तान जिंदाबाद कहना राजद्रोह नहीं… हिमाचल हाई कोर्ट ने आरोपी सुलेमान को दी जमानत

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक सनसनीखेज मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पांवटा साहिब के एक स्ट्रीट वेंडर को जमानत दे दी। इस वेंडर पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ लिखने का आरोप लगा था, लेकिन कोर्ट ने कहा कि अपने देश को नीचा दिखाए बिना किसी दूसरे देश की तारीफ करना देशद्रोह नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

पांवटा साहिब के रहने वाले सुलेमान नाम के एक स्ट्रीट वेंडर ने मई 2025 में सोशल मीडिया पर एक AI-जनरेटेड तस्वीर शेयर की थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो के साथ ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ लिखा हुआ था। इस पोस्ट ने हंगामा मचा दिया और पुलिस ने इसे देश के हितों के खिलाफ मानते हुए सुलेमान के खिलाफ बीएनएस की धारा 152 के तहत मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद सुलेमान ने 8 जुलाई को पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया।

कोर्ट ने क्या कहा?

19 अगस्त को जस्टिस राकेश कैंथला की बेंच ने सुलेमान को 50,000 रुपये के जमानत बांड और एक समान राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि किसी अन्य देश की तारीफ करना, अपने देश को बुरा-भला कहे बिना, देशद्रोह की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने कहा, ‘ऐसा कोई सबूत नहीं है कि इस पोस्ट से भारत सरकार के खिलाफ नफरत या असंतोष फैलाने की कोशिश की गई। न ही यह सशस्त्र विद्रोह, विध्वंसक गतिविधियों या अलगाववादी भावनाओं को बढ़ावा देता है।

पुलिस जांच और कोर्ट का तर्क

पुलिस ने सुलेमान के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को जब्त कर लिया और उसे फोरेंसिक विश्लेषण के लिए जूंगा के स्टेट फोरेंसिक साइंस लैब (SFSL) में भेज दिया। पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल कर दी है, लेकिन कोर्ट ने माना कि सुलेमान की हिरासत में पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा, ‘हिरासत में रखने से कोई खास मकसद पूरा नहीं होगा।’

सुलेमान के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल को गलत तरीके से इस मामले में फंसाया गया है। दूसरी ओर, सरकारी वकील ने तर्क दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के समय ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ लिखना देश-विरोधी कृत्य है। हालांकि, कोर्ट ने सरकारी वकील की इस दलील को खारिज करते हुए सुलेमान को राहत दी।

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