हिमाचल प्रदेश के शिमला के दो बड़े अस्पतालों में शुक्रवार को दो महिलाओं की मौत पर खूब हंगामा हुआ। आईजीएमसी अस्पताल में मौत के बाद शिमला शहर के कमला नेहरू अस्पताल में डिलीवरी के बाद महिला की मौत हो गई। महिला की हालत बिलकुल ठीक थी। लेकिन अचानक उसकी मौत हो गई। महिला के परिजनों ने डॉक्टरों की लापरवाही के आरोप लगाए हैं। महिला के परिजनों ने बताया कि 12 घंटे उसकी डिलीवरी हुई थी और वह बिलकुल ठीक थी। इस दौरान अस्पताल में काफी देर तक परिजन रोते रहे। पति ने भी रोते रोते अपना दुखड़ा सुनाया। इस दौरान जब अस्पताल के मेडिकल सुपरींटेंडेंट मौके पर आए तो परिजनों ने उन पर सवालों की बौछार लगा दी।
इस दौरान मेडिकल सुपरींटेंडेंट भी परिजनों के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि महिला की हालत ठीक थी। इस दौरान मौके पर पुलिस भी पहुंची थी।जानकारी के अनुसार, मृतक महिला की पहचान अंजु के रूप में हुई है, जो कि शिमला जिले के ठियोग के चयोग गांव की रहने वाली थी। गुरुवार को अंजू की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी, जिसमें उसने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया था।डिलीवरी के बाद उसकी हालत सामान्य थी, लेकिन शुक्रवार सुबह लगभग 8:30 बजे जब स्टाफ नर्स ने उसे एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने को कहा, तभी स्थिति बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि शिफ्टिंग के दौरान महिला को बिना किसी स्ट्रेचर के सहारे से पकड़ कर ले जाया गया, जिससे सिजेरियन ऑपरेशन के टांकों से ब्लीडिंग शुरू हो गई और कुछ ही देर में महिला की हालत नाजुक हो गई और उसकी मौत हो गई। घटना को लेकर महिला का पति फूट फूट कर रोता रहा।
उधर, घटना के बाद से प्रदेश में स्वास्थ्य संस्थानों की कलई इन घटनाओं से खुल गई है। उधर, परिजनों ने कहा कि महिला 10 दिन से यहां पर भर्ती थी।ननद ने कहा कि वह रात को अपनी भाभी के साथ थी।भाभी को एकदम से चक्कर आया था. डॉक्टरों ने कहा कि उसका बीपी लो है. मेडिकल सुपरींटेडेंट सुरेंद्र नेगी ने बताया कि डॉक्टरों की लापरवाही से जान नहीं गई है. महिला को शिफ्ट किया जा रहा है तो महिला कॉलेप्स कर गई. फिर भी मामले की आंतरिक तौर पर जांच की जाएगी।
वहीं, महिला के परिजनों से प्रबंधन ने कहा था कि आपको अगर शक है तो महिला का पोस्टमार्टम करवा लें। हालांकि, परिजनों ने इंकार किया है।शिमला के ही आईजीएमसी अस्पताल में मंडी के सराज के रहने वाले पत्रकार लीलाधर ने भी मां की मौत पर डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर उन्हें घुमाते रहे. साथ ही खाली ऑक्सीजन सिलेंडर दिया गया।इस दौरान उनकी महिला डॉक्टर से भी बहस हो गई थी।लीलाधर की मां को हर्ट अटैक आया था और मंडी के नेरचौक मेडिकल कॉलेज से उन्हें रेफर कर शिमला भेजा गया था
