हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के नाहन में एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले में, एक महिला को अपने घर में तीन से अधिक कुत्ते रखने से रोक दिया गया है। यह आदेश उपमंडल दंडाधिकारी राजीव सांख्यान की अदालत ने जारी किए हैं। यह फैसला पड़ोसियों की लगातार शिकायतों और एक विस्तृत कानूनी लड़ाई के बाद आया है। आरोप था कि बड़ी संख्या में कुत्तों के कारण क्षेत्र में गंदगी, बदबू, लगातार भौंकने और सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो गया है। अदालत ने पाया कि इस वजह से इलाके में एक सार्वजनिक उपद्रव पैदा हो गया है, जिसे तत्काल रोकने की जरूरत है।
अदालत ने अपने फैसले से पहले कई बार मामले की सुनवाई की। अदालत ने 19 सितंबर, 2023 को एक सशर्त आदेश जारी किया, जिसमें महिला को तुरंत कुत्तों को हटाने और सार्वजनिक सड़क पर उन्हें खिलाना बंद करने का निर्देश दिया गया। इस आदेश को चुनौती दी। इसके बाद, अदालत ने 19 मई, 2025 को खुद मौके का निरीक्षण किया। इस दौरान पड़ोसियों ने अदालत को बताया कि डॉ मोनिषा के घर में लगभग 70-80 कुत्ते हैं और वह सड़क पर 100-150 आवारा कुत्तों को फीड देती हैं। अदालत ने सीसीटीवी फुटेज भी देखी, जिसमें छोटे पिंजरों में कई कुत्तों को रखते हुए देखा गया। अदालत ने बार-बार उन्हें अपने पास मौजूद कुत्तों की संख्या का हलफनामा दायर करने के निर्देश भी दिए गए।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला सिर्फ राय का अंतर नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक समस्या है। अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग किया। अदालत ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीवन के अधिकार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। अदालत ने स्पष्ट किया कि पशु कल्याण महत्वपूर्ण है, लेकिन यह नागरिकों की सुरक्षा, स्वच्छता और शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता। सर्वोच्च न्यायालय के हाल के फैसलों का हवाला देते हुए, अदालत ने जोर दिया कि नगर पालिकाओं को आवारा कुत्तों की समस्या को मानवीय तरीके से हल करने की जिम्मेदारी लेनी होगी।
अदालत ने डॉ मोनिषा को आदेश दिया है कि इस आदेश के सात दिनों के भीतर वह अपने घर से तीन से अधिक कुत्तों को हटा दें। उन्हें केवल तीन पंजीकृत पालतू कुत्तों को अपने आवासीय परिसर में रखने की अनुमति है, क्योंकि सिद्ध उपद्रव और सार्वजनिक-सुरक्षा के खतरे को देखते हुए यह सीमा जनहित में लगाई गई है। साथ ही पालतू कुत्तों का पंजीकरण, टीकाकरण और नसबंदी का प्रमाण कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, नाहन और अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए भी कहा गया है। इसके अलावा,घर के सामने सार्वजनिक सड़क पर या कॉलोनी में कहीं भी आवारा कुत्तों को खिलाने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
