मंडी: हिमाचल प्रदेश के सराज क्षेत्र में आई आपदा ने सबकुछ तहस-नहस करके रख दिया। पानी के तेज बहाव में घर तो बहे ही, साथ ही बड़ी-बड़ी चट्टानें भी बहकर कहां से कहां जा पहुंची। लेकिन आपदा के बीच आस्था का प्रतीक मानी जाने वाली पांडव शिला अपने स्थान से जरा सी भी नहीं हिली। जबकि मान्यता है कि यह शिला सिर्फ एक उंगली से हिल जाती है। आइए इस पांडव शिला इतिहास के बारे में जानते हैं।
हिमाचल में पिछले कुछ समय में जब प्राकृतिक आपदाएं आई तो उनमें कुछ ऐसे चमत्कार भी देखने को मिले, जिन्होंने सभी को देव आस्था के आगे नतमस्तक होने पर मजबूर कर दिया। 2023 के भारी जल प्रलय में मंडी शहर का प्राचीन पंचवक्त्र मंदिर जलमग्न हो गया। मंदिर के आस पास सब कुछ तहस-नहस हो गया, लेकिन मंदिर का बाल भी बांका नहीं हुआ।
वहीं, इस साल जब सराज में आपदा आई तो यहां भी एक ऐसा ही चमत्कार देखने को मिला. जंजैहली के पास लोगों की आस्था का प्रतीक मानी जाने वाली पांडव शिला का भी आपदा कुछ नहीं बिगाड़ पाई. जबकि इस पांडव शिला को लेकर मान्यता है कि यह मात्र एक उंगली के हिलाने से हिल जाती है. यदि कोई जोर आजमाइश करना चाहे तो यह शिला जरा भी नहीं हिलती. एक नहीं लाखों लोग इस प्रत्यक्ष प्रमाण को स्वयं अपनी आंखों से देख चुके हैं.
मंडी निवासी आचार्य पंकज शर्मा ने कहा, “पांडव शिला का इतिहास द्वापर युग से है. आज भी यह शिला एक स्थान पर टिकी हुई है. इतिहास के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां पर रुके थे और अज्ञातवास के दौरान इस शिला को निशानी के तौर पर रखा था. लोगों की मान्यता है कि इस शिला को श्रद्धा के साथ अगर उंगली से हिलाए तो यह हिल जाती है, लेकिन अगर आपके मन में श्रद्धा भाव नहीं है तो फिर जोर लगाने से भी यह पांडव शिला अपनी जगह से टस से मस नहीं होती हैं। जिन लोगों से यह पांडव शिला हिल जाती है, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं”।
वहीं, इस शिला पर कंकड़ मारने की भी एक मान्यता है. मान्यता है कि अगर कंकड़ शिला पर जाकर टिक जाए तो फिर भक्त की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. साथ ही यह भी मान्यता है, जिनकी संतान नहीं हैं. उन्हें संतान सुख भी प्राप्त होता है.
