जिला सिरमौर के पांवटा साहिब उप मंडल के मेहरूवाला गांव के रहने वाले जावेद अली ने अपनी में लगभग 8000 सफेदा (यूकेलिप्टस) के पौधे लगाए हैं। ये काम उन्होंने अपनी और अपने फौजी भाइयों व परिवार की मेहनत और खुद के संसाधनों से किया है। इस काम में उनका साथ दिया उनके अपने फौजी भाई सलमान खान, मोहम्मद मनोवर और घर पर रहकर खेती-बाडी का काम सम्भाल रहे मोहम्मद बिलाल ने।
जावेद अली ने कहा कि हर बार सोचा कि फसल तो सभी उगाते हैं, क्यों न इस बार पेड़ों से भी भविष्य बोया जाए?‘‘ जावेद अली, किसान लागत ही नहीं, लगन से भी खड़ी की हरियाली हर सफेदा पौधे की औसतन कीमत लगभग 21 रुपऐ रही, दवाएं और देखभाल की जिम्मेदारी खुद उठाई, जमीन तैयार करने से लेकर
पौधों की रोपाई और सिंचाई तक, हर काम खुद के हाथों से किया, इसमें कई हफ्तों की मेहनत, लगातार निगरानी और मौसम से लड़ने की हिम्मत शामिल थी।
उन्होंने कहा कि किसान द्वारा इतने पेड़ लगाना एक मिसाल है। सफेदा 5 से 7 वर्षों में तैयार हो जाता है और इसकी लकड़ी की मांग कागज, फर्नीचर, व प्लाईवुड उद्योग में है। ये पेड़ न केवल हवा को शुद्ध करेंगे बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी सुधारेंगे। यह खेती जल संकट वाले क्षेत्रों के लिए आदर्श है।
मोहम्मद बिलाल ने कहा कि मैं चाहता हूं कि हमारे गांव की पहचान सिर्फ खेतों से नहीं, पेड़ों से भी हो। ताकि आने वाले कल को हम एक हरा भविष्य सौंप सकें,
एक बीज, एक मेहनत, और एक सपना हर खेत में हरियाली हो। आज के समय में जब पर्यावरण संकट बढ़ रहा है तो ये जरूरी है।
जब लोग मुनाफे के पीछे भागते हैं, जावेद अली जैसे किसान ऐसे काम करते हैं, जो जमीन से जुड़े होने के साथ-साथ आने वाले वक्त को भी हरा-भरा बनाते हैं।
