हिमाचल प्रदेश में चार-पांच जिलों में शराब ठेकों को ठेकेदारों को बेचने के लिए राज्य कर एवं आबकारी विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। बताया जाता है कि अभी भी विभाग के पास 50 से ज्यादा ऐसे ठेके हैं, जिनके लिए उन्हें शराब ठेकेदारों की जरूरत है। हालांकि सरकारी एजैंसियों को शराब ठेके दिए गए हैं, मगर उनसे चलाए नहीं जा रहे हैं और वह खुद घाटा खाने को मजबूर हैं। इन परिस्थितियों में शराब ठेकों की नीलामी का दौर लगातार चल रहा है। दो दिन पहले शिमला में भी शराब ठेकों की नीलामी करवाई गई थी, जिसमें एक ठेकेदार को कुछ ठेके दिए गए हैं, वहीं जिला भर में कुल 31 ठेके बचे हुए हैं जिनको खरीददार नहीं मिल रहे। इसी तरह से कांगड़ा, मंडी व कुल्लू में भी स्थिति ऐसी ही बताई जा रही है।
बताते हैं कि केवल सामान्य उद्योग निगम, जो कि खुद शराब का कारोबार पहले से करता है, उसके ठेके ठीक तरह से चल रहे हैं, लेकिन शेष सरकारी एजेंसियां फंसी हुई हैं। क्योंकि उनके पास अनुभव नहीं है और उसके साथ चलाने के लिए कर्मचारियों की भी किल्लत है। साथ ही इन सरकारी एजेंसियों की मानें तो जो घाटे के शराब ठेके थे, वही उनको मिले हैं, जिनको चला पाना उतना आसान नहीं है। ऐसे में इन सरकारी एजेंसियों की लाइसेंस फीस भी फंस गई है, जो कि राज्य कर एवं आबकारी विभाग को चुकता नहीं कर पा रहे हैं। अभी इनसे करोड़ों रुपए की राशि लेने को हैख् जो नगर निगम शिमला ने तो चुकता की नहीं और उसने सभी शराब ठेकों को छोड़ भी दिया है। ऐसी ही दूसरी एजेंसियों के पास भी अभी तक ज्यादा अच्छा कारोबार नहीं हो रहा है और उनका भी पैसा फंसा हुआ है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने पुरानी तय की गई लाइसेंस फीस पर ही शराब ठेकेदारों को ठेकों की नीलामी करना चाह रहा है। इसमें भी शराब ठेकेदार ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
