भारत के पूर्व रॉ प्रमुख एएस दुलत ने कहा कि लद्दाख में सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का फैसला गलत है। कसौली में शुरू हुए खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दौरान शुक्रवार को उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पाकिस्तान से बातचीत बंद कर दी। इससे पहले जितने भी प्रधानमंत्री हुए, उन्होंने बातचीत से मसले हल किए। पाकिस्तान के साथ बातचीत और आना-जाना भी शुरू होना चाहिए। आतंकवाद इस तरह बातचीत बंद करने से नहीं रुकने वाला।
उन्होंने कहा कि 2003 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, उस समय भी सीज फायर हुआ था। बातचीत के जरिये उस समय आतंकवाद काफी कम हो गया था। मनमोहन सिंह सरकार के समय भी बातचीत से ही आतंकवाद को काम किया गया। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी कई बार केंद्र सरकार को बोल चुके हैं कि वह पाकिस्तान से बातचीत करे, नहीं तो जम्मू-कश्मीर को इसका परिणाम भुगतना पड़ रहा है। कहा कि वांगचुक पर आरोप हैं कि उनके पाकिस्तान से संबंध हैं। अगर वह कुछ समय पहले पाकिस्तान गए थे और केंद्र को उन पर शक भी है तो उन्हें जाने ही नहीं देना चाहिए था। दूसरी ओर, लद्दाख में जैन जी जैसे प्रदर्शन मामले में कहा कि आगामी दिनों में जम्मू-कश्मीर में भी ऐसे हालात बन सकते हैं क्योंकि मुख्यमंत्री व स्थानीय बड़े नेता उसका समर्थन कर रहे हैं।
पहलगाम हमला खुफिया एजेंसियों की नाकामी
दुलत ने कहा कि पहलगाम हमला हमारे देश की खुफिया एजेंसी की नाकामी है। उन्होंने कहा कि जब उन्हें पता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो उन्हें सतर्क रहना चाहिए था। आतंकवादी देश में घुसकर इतने लोगों की हत्या कर गए तो खुफिया एजेंसी को इसका पता क्यों नहीं चला, यह भी बड़ा सवाल है।
दुर्रानी की पाकिस्तान सरकार ने पेंशन कर दी थी बंद
दुलत और पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस निदेशालय के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल असद दुर्रानी की किताब के बारे में उन्होंने कहा कि इस पर विवाद पाकिस्तान में ज्यादा हुआ था, क्योंकि जनरल दुर्रानी की पाकिस्तान की सरकार ने पेंशन तक बंद कर दी थी। जब मैंने इस बारे में उनसे बात की तो उन्होंने कहा कि डरने की जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि पूर्व रॉ प्रमुख दुलत और जनरल असद दुरानी ने मिलकर ‘स्पाई क्रॉनिकल’ किताब लिखी थी। इसमें भारत-पाक संबंधों और खुफिया एजेंसी का खुलकर जिक्र किया था
